वर्ण की परीभाषा

वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते है जिसका खंड नही होता | अर्थात् जिसका विभाजन नही होता |

लिपि

– लिखित भाषा में मूल ध्वनियों के लिये जो चिह्न मान लिए जाते है और जिस रूप में लिखे जाते है उसे लिपि कहते है |हिंदी भाषा देवनागरी लिपि में लिखि जाती है|

वर्ण परिचय


स्वर और व्यंजन वर्ण के अंतर्गत आते है |जिसका विवरण निम्नलिखित है |

स्वर


स्वर वे वर्ण होते है जिनके उच्चारण के लिये अन्य किसी ध्वनि की सहायता की आवश्यकता नही होती है |स्वर व्यंजनों के उच्चारण में सहायक होते है | संस्कृत व्याकरण में स्वरों को अच् कहा जाता है |

स्वर के भेद

–स्वर के निम्न भेद है :

हृस्व स्वर

– जिन स्वरों के उच्चारण में कम समय लगे अर्थात एक मात्रा के उच्चारण का समय लगता है ,हृस्व स्वर कहलाता है | जैसे – अ,इ,उ आदि |

दीर्घ स्वर

– जिन स्वरों के उच्चारण में अधिक समय लगे अर्थात दो मत्राओं का समय लगता है , दीर्घ स्वर कहलाता है | जैसे – आ, ई, ऊ, आदि |

प्लुत स्वर

– जिनके उच्चारण में हृस्व स्वर का तीन गुना समय लगता है अर्थात तीन मात्रा का समय लगता है ,प्लुत स्वर कहलाता है | उसकी पहचान के लिये स्वर के आगे तीन का अंक लिखने का प्रचलन है |इसका प्रयोग कम होता है |
जैसे – ओ3म् ,बाप रे3, आदि |

स्वरों के पहचान व चिह्न :-

= कोई मात्रा नहीं |
= (T)
= (ि )
= ( ी)
= ( ु)
= ( ू)
= (ृ)
= ( े)
= ( ै)
= ( ो)
= ( ौ)

[ हिन्दी भाषा में 11 स्वर होते है ,शेष कुछ स्वर और है जिनका प्रयोग संस्कृत भाषा में किया जाता है | ]

व्यंजन

– ऐसी ध्वनियँ जो स्वरों की सहायता से बोली जाती है , उसे व्यंजन कह्ते है | संस्कृत भाषा में व्यंजन को हल् भी कहा जाता है | जैसे –क् + अ = क |

व्यंजन के भेद

– मूल रूप से 33 व्यंजन है |जिसमें स्पर्श व्यंजन , अंतस्थ व्यंजन एवं ऊष्म व्यंजन आते हैं, इसके अतिरिक्त संयुक्त व्यंजन ,विसर्ग ,अनुस्वार , अनुनासिक व्यंजनों का वर्णन निम्न है :‌

स्पर्श व्यंजन

– जिन व्यंजन वर्णों का उच्चारण मुख के विभिन्न भागों के स्पर्श द्वारा होता है ,उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते है |इनकी संख्या 25 है :-
1. क वर्ग- क, ख, ग, घ, ड.
2. च वर्ग – च, छ, ज, झ, ञ
3. ट वर्ग – ट, ठ, ड, ढ, ण
4. त वर्ग – त, थ, द, ध, न
5. प वर्ग – प, फ, ब, भ, म

अंतस्थ व्यंजन

य, र, ल, व

ऊष्म व्यंजन

– जिन वर्णो के उच्चारण करने से ऊष्मा पैदा होती है उसे ऊष्म व्यंजन कहते है |
श, ष, स, ह

संयुक्त व्यंजन

– दो व्यंजनों के मिलने से जो वर्ण बनते है उसे संयुक्त व्यंजन कहते है |
क्ष, त्र, ज्ञ
क्ष = क् + श
त्र = त् + र
ज्ञ = ज् + ञ ´
<h3<विसर्ग

– जिस वर्ण की अंतिम ध्वनि ‘ह’ शेष रहती है ,उसे विसर्ग कहते है | वर्ण के बाद ऊपर-नीचे दो बिंदु द्वारा दर्शाया जाता है | जैसे – [ : ] – मोहन: , राम: , बालक: आदि |

अनुस्वार

– इसका प्रयोग वर्ण के ऊपर एक बिंदु के रूप मे किया जाता है | जैसे – [ ं] – कंश , दंत , हंश आदि |

अनुनासिक व्यंजन

– पांचों वर्णों के अंतिम वर्णों को अनुनासिक व्यंजन कहते हैं | जिसका उच्चारण नाक के सहयोग से होता है | जैसे – ड., ञ , ण , न ,म |
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हिंदी वर्णमाला

स्वर

अ , आ , इ ,ई , उ , ऊ, ऋ
ए ,ऐ ,ओ ,औ ,अं ,अ:

व्यंजन

क ,ख, ग, घ ,ड.
च ,छ ,ज ,झ ,ञ
ट, ठ ,ड ,ढ ,ण
त ,थ ,द ,ध ,न
प ,फ ,ब ,भ ,म
य ,र ,ल ,व
श ,ष स ,ह
क्ष ,त्र ,ज्ञ


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